प्रेस विज्ञप्तियां / २००४ – नवंबर ८  नई दिल्ली

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दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के उपाध्यक्ष ने महाराज जी के संदेश को ‘‘सचमुच ही विशिष्ट’’ कहा


नई दिल्ली, नवंबर ८: महाराज जी को दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के ‘‘इंजीनियरिंग में मूल्य शिक्षण का राष्ट्रीय संसाधन केंद्र’’ में शिक्षकों, अतिथियों एवं छात्रों के समक्ष व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया।

यह केंद्र शिक्षण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं मानव मूल्यों को समेकित करना चाहता है, ताकि छात्रों को ज्ञान एवं जानकारी सही अनुपात में प्राप्त हो सके।

दिल्ली का भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भारत के सात विश्व-विख्यात प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है। बिजनेस वीक पत्रिका के अनुसार इन संस्थानों से निकले छात्र भारत द्वारा निर्यातित सबसे मूल्यवान वस्तु हैं।


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों से निकले कुछ प्रमुख व्यक्ति हैं: विक्टर मेनेज़ेस, सिटीबैंक के उपाध्यक्ष; विनोद खोसला, अमरीका के सिलिकोन वैली के प्रमुख वेंचर पूंजी फर्म क्लेइनेर पेर्किन्स कौफील्ड एंड बेएर्स के प्रमुख साझेदार; राकेश गंगवाल, यूएस एयरवेस के अध्यक्ष; नंदन नीलकणि, इन्फोसिस के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी; तथा अनेक अन्य।

महाराज जी का स्वागत करते हुए इंजीनियरिंग में मूल्य शिक्षण के राष्ट्रीय संसाधन केंद्र के अध्यक्ष ने कहा: ‘‘यह उचित ही है कि प्रेम रावत को यहां शांति के बारे में अपना विशिष्ट दृष्टकोण रखने के लिए निमंत्रित किया जाए। उनका कहना है कि निजी परिस्थितियां चाहे जो हों, हर व्यक्ति भीतरी शांति एवं संतृप्ति से भरा-पूरा जीवन बिता सकता है, और प्रेम रावत इसकी राह दिखाने के लिए सदा तत्पर रहते हैं। उन्हें देश-विदेश के सर्वोच्च मंचों से बोलने का अवसर मिला है, फिर भी उनके संदेश इतने सरल हैं कि सर्वसाधारण तक पहुंच जाते हैं और उनके जीवन में भीतरी शांति एवं संतृप्ति लाने की प्रेरणा देते हैं।’’

दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के उपाध्यक्ष ने बाद में कहा, ‘‘प्रेम रावत के कुछ व्याख्यानों को पढ़कर तथा उनके कुछ वीडियो देखकर मुझे प्रतीत होता है कि वे एक ऐसा संदेश सबके सामने रखते हैं जो कहता है कि यह हर मनुष्य का जन्म-सिद्ध अधिकार है कि वह अपने जीवनकाल में शांति की अनुभूति करे। वे जोर देकर कहते हैं कि समाज के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने के साथ-साथ हमें अपने प्रति अंतिम दायित्व को भी पूरा करना चाहिए, जो है इस जीवन में पूर्णता एवं संतृप्ति प्राप्त करना।’’


दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में आयोजित यह समारोह भारतीय उपमहाद्वीप के हमारे दौरे का प्रारंभ बिंदु है। महाराज जी इस उपमहाद्वीप के नौ प्रमुख नगरों में व्याख्यान देंगे।