प्रेस विज्ञप्तियां / २००४ - दिसंबर ८

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विश्व भर में महाराज जी के नए छात्रों की संख्या सर्वाधिक हुई


लंदन, दिसंबर ०८: यह वर्ष प्रेम रावत (महाराज जी) के लिए अत्यंत शुभ एवं सफल सिद्ध हो रहा है। टेलिविजन, इंटरनेट और रेडियो के माध्यम से जैसे-जैसे उनका संदेश अधिकाधिक लोगों तक पहुंचता जा रहा है, उनसे शांति प्राप्त करने की तकनीक सीखने की इच्छा रखनेवाले व्यक्तियों की संख्या भी बढ़ रही है। यह प्रथम वर्ष है जब उनके नए छात्रों की संख्या ५०,००० से अधिक हुई। पिछले चार वर्षों में ज्ञान प्राप्त करने की प्रेम रावत की तकनीक सीखनेवालों की संख्या में (भारत के बाहर) २७० प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या ५२ प्रतिशत बढ़ी है।

महाराज जी ने अपना शांति-संदेश पश्चिम में सत्तर के दशक के प्रथम वर्षों में सुनाया था जब उन्हें कुछ छात्रों ने वहां आमंत्रित किया था। तबसे उनके शिष्यों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अब प्रेम रावत के प्रवचन ८८ देशों में और ७० भाषाओं में उपलब्ध हैं। उन्होंने लाखों लोगों को अपने ही भीतर शांति प्राप्त करने की प्रेरणा दी है और उन्हें इस कार्य में मार्गदर्शन दिया है। उन्होंने ५० देशों में २५० से अधिक शहरों में व्याख्यान दिए हैं।


इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में यूरोप में प्रेम रावत के दीक्षा-सत्रों की संख्या में ७६ प्रतिशत वृद्धि हुई और अमरीका में यह संख्या ३०० प्रतिशत बढ़ी। इन सत्रों में प्रेम रावत ज्ञान की सीख देते हैं। भारत में उनके शिष्यों की संख्या ३५ प्रतिशत बढ़ी। उत्तर प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में उनके सत्रों की संख्या चौगुनी से अधिक बढ़ी। दक्षिण अमरीका में पिछले वर्ष उन्हें १,००० से अधिक नए शिष्य प्राप्त हुए, और अफ्रीका में उनके नए शिष्यों की संख्या में ८० प्रतिशत बढ़ौत्तरी हुई।

पिछले सप्ताह ब्राजील में शांति का संदेश नामक उनके साप्ताहिक विश्वव्यापी टेलिविजन कार्यक्रम को ब्राजीलियन एसोसिएशन ओफ कम्यूनिटी टेलिविशन चैनेल्स का सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान किया गया। शांति का संदेश कार्यक्रम उपग्रह के माध्यम से ५० देशों में ४५ भाषाओं में प्रसारित किया जाता है। महाराज जी का संदेश १५ से अधिक भाषाओं में चौबीसों घंटे इंटरनेट रेडियो से उपलब्ध है।


प्रेम रावत फाउंडेशन अपने जाल स्थल www.tprf.org के माध्यम से विभिन्न प्रकार की मुद्रित, श्रव्य एवं वीडियो सामग्री देखने-सुनने, पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध कराता है।

अभी हाल में हार्वाड विश्वविद्यालय के सैंडर्स सभागृह में शिक्षकों, अतिथियों और छात्रों को संबोधित करते हुए महाराज जी ने कहा, प्रत्येक मनुष्य के हृदय में शांति निवास करती है, एक ऐसी शांति जो क्षण-भंगुर नहीं है, जो राजनीति से संपृक्त नहीं है। यह शांति किसी सुंदर वस्तु की उपस्थिति के कारण है, किसी वस्तु के न होने से नहीं। जो भी इस सत्य को पाना चाहता है, उसे मैं रास्ता दिखा सकता हूं, मेरी यही पेशकश है।

महाराज जी (प्रेम रावत) के बारे में अधिक जानकारी के लिए तथा ज्ञान शब्द के अर्थ के विश्लेषण के लिए इस जाल स्थल पर पधारें: www.tprf.org

स्रोत: प्रेम रावत प्रतिष्ठान, अमरीका: (३१०)३९२-५७००