प्रेम रावत: हृदय के प्रति वादा
इस दुनिया में हम बहुत कुछ सीखते हैं, लेकिन कुछ चीज़ भूल जाते हैं। हम अपने उत्तरदायित्वों के बारे में सीखते हैं, पर हम इस हृदय को किये गये वादे भूल जाते हैं।
हम दूसरों के साथ अपने संबंधों को समझ लेते हैं, पर जीवन के साथ के संबंध भूल जाते हैं।
हमने बहुत सी भावनाएं महसूस की हैं, कमी है तो केवल शांति की।
हमने बहुत सी यात्राएं की हैं, केवल एक यात्रा रह गई है, अपने ही भीतर की यात्रा, जिसमें हम शंकाओं, भ्रम, और प्रश्नों से सताए नहीं जाते। जहां सरलता है, जहां इस जीवन का आनंद है।
जीवन में हमने जितना सोच रखा है उससे कहीं अधिक कुछ है।
हमारे साथ जो कुछ भी घटी चुका है, उससे अधिक भी कुछ है। और वह हमारे भीतर है।