Prem Rawat talks about an inner connection called Knowledge

मैं खोजता हूँ, लेकिन नहीं जानता क्यों।

मैं खोजता हूँ क्योंकि मुझे लगा है कि मुझे खोजना चाहिए। मैं खोजता हूँ क्योंकि मैंने कहीं पढ़ा है कि ऐसा करना एक अच्छी बात है। और उस सारे समय में मैं उस असली जादू को समझ नहीं पाया हूँ। अब मैं आपको बताऊं कि वह क्या है।

इतनी नैसर्गिक एवं इतनी मूलभूत है यह संतुष्ट होने की इच्छा। मैं संतुष्टि शब्द का प्रयोग कर रहा हूँ जो शायद एकदम सही न हो, और यह कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि यहाँ जो भावना आप देख रहे हैं, वह एक भावना ही है।

 

 

 

 

 

जब से भाषाएं अस्तित्व में आई हैं, और मनुष्य ने लिखना सीखा है, वह अपनी इस भावना का वर्णन करने की कोशिश करता आ रहा है।

उसने इसे 'शांति' कहा, और यह पर्याप्त नहीं था। वह यह जानता था।

समरसता – यह ठीक नहीं था। धीरता – यह ठीक नहीं था। प्रेम – यह ठीक नहीं था। खुशी – यह ठीक नहीं था।

 

 

 


 

 

Flowing water

इस मूलभूत तृष्णा की ताकत, इस मूलभूत खोज की ताकत, आपको इसे जरूर समझना चाहिए। और केवल समझना ही नहीं चाहिए, उसके सामने आत्म-समर्पण भी कर देना चाहिए। क्योंकि आप उससे लड़ नहीं सकते। उसे आपको जीत लेने दीजिए। उसे आने दीजिए। और उसे आपको निगल लेने दीजिए। क्योंकि इसका अर्थ होगा शांति में निमग्न होना– कैसे? जैसे सागर में गिरी एक बूंद।

 

 

 

 

वह बादल छोड़ती है एक बूंद के रूप में, और वह एक बूंद है, एक बूंद है, एक बूंद है, एक बूंद है, एक बूंद है...

और जिस पल वह सागर को छूती है, वह हो जाती है एक सागर, अब वह नहीं रही एक बूंद।

आप देख रहे हैं, यह कैसे होता है? है न यह एक रोचक बात? एक छोटी, नन्ही बूंद, कुछ हजार फुट गिरती हुई: बूंद, बूंद, बूंद, बूंद, बूंद। उसका एक अस्तित्व है, उसकी एक पहचान है, वह एक बूंद है। वह है, वह एक वस्तु है, और वह नन्ही है।

 

 

 

 

 

Falling water

और वह गिरती जाती है, गिरती जाती है, गिरती जाती है…उसके पास कोई और विकल्प नहीं है। हवाएं उसे उड़ाती हैं, वह उड़ती जाती है। हवाएं उसे उठाती हैं, वह उठती जाती है, और फिर गिरने लगती है। फिर से यही सब होता है। दाएं, बाएं, जहां हवाएं बहाएं, वहां वह बह जाती है।

 

 

 

 

और वह उन सभी तत्वों की दासी है, जो उस पर कार्य करना चाहते हैं। और वह गिरती जाती है, गिरती जाती है, और फिर 'प्लुक', बस उस एक जादूई पल में। यदि आपने इसे देखा हो, मैं नहीं जानता कि आपने इसे देखा है या नहीं, लेकिन जब वर्षा होती है, और समुद्र के ऊपर गिरती है, तो वर्षा की बूंदें नन्ही तरंगें पैदा करती हैं और फिर गायब हो जाती हैं। उनकी अंतिम निशानी वे तरंगें ही हैं। बहुत बड़ी भी नहीं, और वे भी विलीन हो जाती हैं।

 

 

 

 

Ocean water

मैं आपके बारे में नहीं जानता, परंतु मैं यही चाहूंगा, उस आनंद में विलीन हो जाना। जहां अब हम अभिन्न हैं। हवाओं, अब तुम सारी शक्ति लगा लो, मुझे हिलाने का प्रयास करो। अब मैं बेसहारा नहीं हूँ, मैं समुद्र की ताकत से खड़ा हूँ - जो तरल है।

 

 

परंतु – क्या मैं अब भी चलमान हूँ?

बेशक।

मैं बड़ी-बड़ी जगहों में जाने वाला हूँ: जहां मैं बूंद होकर जाने की सोच भी नहीं सकता था।

मैं जगह-जगह जाने वाला हूँ,

मैं बहुत सी चीजें देखने वाला हूँ,

और मैं उस महान समुद्र का एक हिस्सा बनने वाला हूँ।

Maharaji speaks at events held worldwide on inner peace