यह कोई प्रदर्शन नहीं है –
न गिटार, न पियानो, न वायलिन,
न ढोल – बस एक सरल गीत
जो आपके भीतर रहता है।
सवाल यह नहीं है कि,
क्या यह गीत अस्तित्व में है?
बिल्कुल, यह अस्तित्व में है।
सवाल यह है कि,
क्या आप इसे सुनना चाहते हैं?
- प्रेम रावत, कैनकन, मैक्सिको, 2012