संजोग

Sanjog

अँधेरे से उभरता मैगनोलिया का एक अकेला फूल

अपने जीवन में इस जादू का स्वागत कीजिए।

खुली बाँहों से।

और कहिए, “हाँ, मुझे जो सुंदरता मिली है,
मैं उसे गले लगाने के लिए तैयार हूँ।”

मंद मुस्कान के साथ प्रेम रावत

गुरु बोलते हैं, हम सुनते हैं—
और भीतर कुछ जाग उठता है।

कुछ अच्छा लगने लगता है, भीतर कुछ नाच उठता है।

हाँ।

“मैं आपकी बात सुनने के लिए तैयार हूँ, क्योंकि मेरी ज़िंदगी में किसी ने भी मुझसे वह नहीं कहा, जो आप कहते हैं...”

आप मेरे लिए आशा लाते हैं, एक वादा लेकर आते हैं।

आप मेरे लिए ऐसा संदेश लाते हैं, जो मेरे जीवन में उजाला भर देता है।

गंभीरता से बोलते हुए प्रेम रावत

सुनिए कि गुरु क्या कहते हैं।

उन गहरी खाइयों पर पुल बनने दीजिए, जिन्हें पार करना असंभव-सा लगता है। तब इस जीवन का असली जादू आपके लिए जीवंत हो उठेगा।

जब लोग उस एक चीज़ का—उस एक आनंद का, उस एक सुंदरता का—उत्सव मनाने के लिए एकत्र होते हैं, तो मैं वहाँ होना चाहता हूँ।

क्योंकि मेरे लिए इस धरती पर इससे अधिक गहन कुछ नहीं है।

और जब लोग उस आनंद का उत्सव मनाने आते हैं, तो मेरी साँसें... थम-सी जाती हैं। क्योंकि मैं जानता हूँ कि वह आनंद कितना सच्चा है।

जो व्यक्ति आने और सुनने का संकल्प लेता है—मैं उसी से बात करता हूँ।

जो इस जीवन में रुचि रखते हैं—मैं उन्हीं से बात करना चाहता हूँ—मेरे पास कहने को कुछ है।

जो जीवन में पूर्णता की आकांक्षा रखते हैं—आपके लिए मेरे पास एक संदेश है।

बाँहें उठाकर नृत्य करते प्रेम रावत

जो अपने हृदय की सुनना चाहते हैं, उनके लिए
मैं एक सुंदर गीत गाऊँगा।

यह जीवन, यह समय—कोई दिखाने वाला, कोई देखने को तैयार।

और अगर कोई दिखाने को तैयार हो और कोई देखने को तैयार हो—तो जादू होता है।

जादू होता है।

बाँहें उठाकर नृत्य करते प्रेम रावत

यही वह जगह है जहाँ—पक्षी नहीं, तितलियाँ नहीं—बल्कि इंसान आज़ाद होते हैं।

यहीं बिना पंखों वाले उड़ान भरते हैं।

और यही है ज्ञान की इस सुंदर, अद्भुत दुनिया का जादू।

यहीं जीते-जागते इंसानों को जीवन का पाठ पढ़ाया जाता है।

पंखुड़ियों पर पानी की एक बूँद लिए गुलाब