प्रेम रावत: “सेतु”

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एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रेम रावत

अपनी आँखें खोलो और हर कदम पूरी सजगता और सच्चे मन से उठाओ।

अपने भीतर की आँखें खोलो और हृदय के इस अद्भुत नगर में चारों ओर देखो। इन सुंदर रास्तों को देखो। और देखो, कैसे शांति तुम्हारी ओर चली आ रही है। फिर ठहर जाओ। बिल्कुल स्थिर होकर खड़े रहो, ताकि शांति तुम्हें ढूँढ़ सके। अपनी जगह से मत हिलो। बिल्कुल मत हिलो।

उसे आने दो, तुम्हें छूने दो, तुम्हें अपने आगोश में भर लेने दो।

अपने भीतर से उमड़ते उस सुंदर प्रेम को आने दो और तुम्हें अपनी बाँहों में थाम लेने दो। स्थिर रहो। बिल्कुल, बिल्कुल स्थिर।

किसी विचार या किसी सपने के कोने में छिपकर नहीं, बल्कि सबसे चौड़े रास्ते पर, सबसे व्यस्त चौराहे के ठीक बीच में।

स्थिर रहो, लेकिन अपनी उपस्थिति को छिपाओ मत।

गुलाबी मैग्नोलिया का फूल

खुद को अदृश्य बनाने की कोशिश मत करो।

यह तुम्हारे जीवन में छिपने का समय नहीं है। तुम्हें जो भी दिन मिला है, वह एक ऐसा दिन है जब तुम हृदय के नगर में जा सकते हो। यह विनम्र होने का दिखावा करने का समय नहीं है — नहीं। यह अपनी उपस्थिति को खुलकर स्वीकार करने का समय है।

जैसे यह जीवन तुम्हारे सामने स्पष्ट है। जैसे यह साँस स्पष्ट है — है ना? बिल्कुल स्पष्ट।

सफेद मैग्नोलिया का फूल

तुम्हारा अस्तित्व स्पष्ट है। वह किसी पहाड़ में किसी पत्थर के नीचे छिपा हुआ नहीं है।

वह किसी हरे-भरे जंगल की घास के नीचे छिपा हुआ नहीं है। यहीं है, सामने है। तुम्हारी खोज भी स्पष्ट है।

यह खोज हमेशा से रही है, और पूर्ण होना चाहती है।

और सबसे बड़ा जादू, सबसे अद्भुत चमत्कार घट चुका है — तुम्हें जीवन मिला है।

गहरे हरे रंग की शांत पृष्ठभूमि में बैंगनी फूल

तुम्हें जीवन मिला है ताकि यह संभव हो सके। ताकि यह साकार हो सके।

यह अस्तित्व क्या है? इसे कम मत आँको।

यह अस्तित्व क्या है? मैं तुम्हें बताता हूँ कि यह अस्तित्व क्या है।

यह बहुत विशेष है। और जानते हो कि यह विशेष क्यों है?

क्योंकि यह एक सेतु है — सीमित और असीम के बीच एक अद्भुत सेतु।

फूलों की मंडला शैली में अमूर्त कलाकृति

यहीं यह घटित होता है। यहीं दोनों का मिलन होता है।

यही वह दहलीज़ है जहाँ दोनों मिल सकते हैं — जहाँ नश्वर मनुष्य अमरत्व का अनुभव कर सकता है।

बस, और कुछ नहीं।